मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में व्याख्यान एवं कवि दरबार का आयोजन

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मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में व्याख्यान एवं कवि दरबार का आयोजन

चंडीगढ़, 20 फरवरी 2026- मातृभाषा दिवस के उपलक्ष्य में पंजाबी साहित्य सभा, स्कूल ऑफ पंजाबी स्टडीज़, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ द्वारा 20 फ़रवरी 2026 को एक व्याख्यान एवं कवि दरबार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि स्वर्णजीत सावी का विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया तथा विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने काव्य-पाठ प्रस्तुत कर अपनी मातृभाषा की समृद्धि और भावनात्मक गहराई को प्रदर्शित किया। पूर्व पुलिस प्रमुख जी. एस. औजला ने विशेष अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

कार्यक्रम का शुभारंभ विभागाध्यक्ष प्रो. योगराज के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने मुख्य वक्ता तथा विभिन्न विभागों से आए छात्र कवियों का हार्दिक स्वागत किया और मातृभाषा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि यह पंजाबी भाषा के लिए गर्व की बात है कि आज यह विश्व की नौवीं सबसे बड़ी भाषा बन चुकी है। वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों में लगभग 31 करोड़ लोग पंजाबी बोलते हैं। साथ ही उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि रोजगार और प्रशासन के क्षेत्रों में पंजाबी को अभी तक उसका उचित स्थान प्राप्त नहीं हो पाया है।

मुख्य वक्ता स्वर्णजीत सावी ने अपने व्याख्यान में कहा कि मातृभाषा व्यक्ति की पहचान और सांस्कृतिक जुड़ाव की आधारशिला होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में कविता और सृजनात्मक लेखन के माध्यम से अपने विचार और भावनाएँ व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि युवा लेखकों की जिम्मेदारी है कि वे समकालीन सामाजिक मुद्दों को अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य में स्थान दें।

विशेष अतिथि के रूप में पूर्व पंजाब पुलिस प्रमुख जी. एस. औजला ने विद्यार्थियों को सुंदर कविताएँ प्रस्तुत करने पर बधाई दी और उन्हें अपनी मातृभाषा की शक्ति और सामर्थ्य को पहचानने पर बल दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कवि दरबार रहा, जिसमें विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने हिंदी और पंजाबी में अपनी कविताओं का पाठ किया। इन कविताओं में सामाजिक सरोकारों, सांस्कृतिक मूल्यों और व्यक्तिगत अनुभवों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति देखने को मिली।

पंजाबी साहित्य सभा की अध्यापक प्रभारी एवं विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. परमजीत कौर सिद्धू ने कार्यक्रम में शामिल छात्र कवियों और मुख्य वक्ता का धन्यवाद किया तथा पंजाबी साहित्य सभा को इस कार्यक्रम के आयोजन पर बधाई दी। उन्होंने मातृभाषा की सांस्कृतिक, बौद्धिक और भावनात्मक महत्ता पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं होती, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक मूल्यों की वाहक भी है।

मंच संचालन पंजाबी साहित्य सभा के अध्यक्ष दया सिंह ने किया, जिन्होंने कार्यक्रम को सुचारू रूप से संचालित किया और पूरे सत्र के दौरान श्रोताओं को जोड़े रखा। कार्यक्रम के अंत में सभी सहभागी विद्यार्थियों को उनके योगदान की सराहना में प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। अतिथिवक्ता स्वर्णजीत सावी को भी आभार स्वरूप स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इस अवसर पर पंजाबी कहानीकार हरप्रीत चन्नू, पंजाबी कवि कमलजीत, प्रो. डॉ. अकविंदर कौर तनवी, डॉ. पवन कुमार, रविकुमार और जसपाल सिंह सहित शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन गर्व और प्रेरणा के भाव के साथ हुआ, जिसने अपनी मातृभाषा के संरक्षण और उत्सव के महत्व को पुनः स्थापित किया।

 

Media PBN Staff

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