पंजाब यूनिवर्सिटी में विशेष व्याख्यान: यूनानी साहित्य के दर्पण में दिखा प्राचीन भारत का स्वरूप
पंजाब यूनिवर्सिटी में विशेष व्याख्यान: यूनानी साहित्य के दर्पण में दिखा प्राचीन भारत का स्वरूप
भारत और यूनान के सदियों पुराने ज्ञान-संवाद पर पंजाब यूनिवर्सिटी में बौद्धिक चर्चा
जेएनयू के विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार सिंह ने पीयू में भारत-यूनान संबंधों की ऐतिहासिकता पर डाला प्रकाश
चंडीगढ़, 17 फ़रवरी 2026 –
पंजाबी साहित्य सभा, पंजाबी अध्ययन स्कूल, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़ द्वारा आज दिनांक 17 फ़रवरी 2026 को “यूनानी साहित्य में प्रतिबिंबित भारत” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह व्याख्यान जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के भाषा, साहित्य और संस्कृति अध्ययन विभाग की ग्रीक चेयर के प्रोफेसर तथा इंडो-हेलनिक रिसर्च सेंटर के मानद अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार सिंह द्वारा दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत विभाग के चेयरपर्सन प्रो. योगराज के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने अतिथि विद्वान का हृदय से स्वागत करते हुए विषय की अकादमिक महत्ता पर अपने विचार साझा किए। मंच संचालन की भूमिका निभाते हुए विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. परमजीत कौर सिद्धू ने मुख्य वक्ता का परिचय कराया और साहित्य, संस्कृति तथा भाषा के विद्यार्थियों के लिए ग्रीक परंपरा की समझ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए ऐसे विशेष व्याख्यान की सार्थकता से विद्यार्थियों को अवगत कराया।
डॉ. अनिल कुमार सिंह ने अपने व्याख्यान में प्राचीन यूनानी साहित्य, ऐतिहासिक दस्तावेज़ों और यात्रा-वृत्तांतों में उभरते भारत के बिंब पर चर्चा करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत की तरह ग्रीस के पास भी ज्ञान और दर्शन की दीर्घ परंपरारही है और इन परंपराओं के बीच लंबे समय तक संवाद चलता रहा है। डॉ. सिंह ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि विश्व को समझने के लिए भारत और ग्रीस के प्राचीन संबंधों और संवाद को समझना आवश्यक है।
इस अवसर पर विभाग के शोधार्थी गुरचरण ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में स्थापित ग्रीक चेयर के बारे में जानकारी साझा की। व्याख्यान के बाद विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने गंभीर अकादमिक प्रश्न पूछे, जिनके डॉ. सिंह ने विस्तृत और जानकारीपूर्ण उत्तर दिए। अंत में विभाग की ओर से अतिथि विद्वान को स्मृति-चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
यह व्याख्यान विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक सिद्ध हुआ। इस कार्यक्रम के दौरान विभाग के प्रो. डॉ. सरबजीत सिंह, डॉ. अकविंदर रतनवी, डॉ. पवन कुमार, रविकुमार और जसपाल सिंह सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

