चंडीगढ़: कहानी-संग्रह ‘बर्निंग स्नो’ पर गोष्ठी का आयोजन
कहानी-संग्रह ‘बर्निंग स्नो’ पर गोष्ठी का आयोजन
चंडीगढ़
पंजाबी साहित्य सभा, पंजाबी अध्ययन स्कूल, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ द्वारा पंजाबी साहित्य अकादमी, लुधियाना के सहयोग से निर्मल जसवाल के कहानी-संग्रह ‘बर्निंग स्नो’ पर “एक पुस्तक: एक संवाद” के अंतर्गत एक गोष्ठी आयोजित की गई।
गोष्ठी के आरंभ में पंजाबी साहित्य अकादमी लुधियाना के अध्यक्ष डॉ. सरबजीत सिंह ने गोष्ठी में शामिल विद्वानों और वक्ताओं का स्वागत किया तथा साहित्य अकादमी लुधियाना द्वारा संचालित साहित्यिक गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। मंच संचालन की जिम्मेदारी निभाते हुए विभाग की प्राध्यापिका डॉ. परमजीत कौर सिद्धू ने कहानी लेखिका निर्मल जसवाल के कथा-बोध से पाठकों को परिचित कराया। उन्होंने बताया कि निर्मल जसवाल पंजाबी की एक विशिष्ट और स्थापित लेखिका हैं, जो स्वयं को केवल नारी के अस्तित्व और पहचान के प्रश्नों तक सीमित न रखकर सामाजिक समस्याओं के व्यापक संदर्भ को अपने कथा-जगत का आधार बनाती हैं। उनकी कहानियों के विषय समाज से जुड़े हुए हैं और वे सामाजिक यथार्थ को बेबाकी से प्रस्तुत करती हैं।
इस गोष्ठी में कहानी-संग्रह ‘बर्निंग स्नो’ पर दो शोध-पत्र पढ़े गए। पहला शोध-पत्र डॉ. जतिंदर सिंह ने प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने शोध-पत्र में पंजाबी कहानी परंपरा के संदर्भ में समकालीन पंजाबी कहानी की विशिष्टता पर चर्चा करते हुए निर्मल जसवाल की कहानियों के सामाजिक और ऐतिहासिक पक्ष को उजागर किया। दूसरा शोध-पत्र पंजाबी के प्रसिद्ध कहानीकार जसवीर राणा द्वारा प्रस्तुत किया गया। जसवीर राणा ने विस्तार से ‘बर्निंग स्नो’ की कहानियों का विश्लेषण करते हुए जहाँ इन्हें समकालीन मनुष्य की संवेदनाओं को छूने वाला बताया, वहीं सामाजिक और राजनीतिक स्वभाव वाली कहानियों के संदर्भ में निर्मल जसवाल की राजनीतिक चेतना के महत्वपूर्ण बिंदु प्रस्तुत किए।
प्रसिद्ध पंजाबी कहानीकार जतिंदर हंस ने कहानियों पर बहस की शुरुआत करते हुए इनके सृजनात्मक पक्षों पर कई महत्वपूर्ण बिंदु रखे। फ्रेंच विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. बलजीत कौर ने निर्मल जसवाल की कहानी ‘वैम्पायर’ का समाज-भाषावैज्ञानिक दृष्टिकोण से विश्लेषण प्रस्तुत किया। इस गोष्ठी की अध्यक्षता पंजाबी विभाग के प्रमुख प्रो. योगराज ने की। अपने अध्यक्षीय भाषण में उन्होंने कहा कि निर्मल जसवाल पंजाबी कहानी की तीसरी पीढ़ी की परिपक्व लेखिका हैं, जो अपने निजी जीवन के अनुभवों से अपनी कहानियों की संरचना तैयार करती हैं।
इस अवसर पर विभाग के अन्य अध्यापक प्रो. अकविंदर कौर तनवी, रवि कुमार तथा कहानीकार परमजीत सिंह मान, पाल अजनवी, अवतार सिंह पतंग, परमिंदर कौर ग़ज़लगो, गुल परमिंदर कौर सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी और शोधार्थी उपस्थित रहे।

