Punjab News: ‘बदलाव’ के दावों की निकली हवा; कंप्यूटर अध्यापकों ने सरकार के विरुद्ध खोला मोर्चा, छेड़ेंगे जन आंदोलन
‘बदलाव’ के दावों की निकली हवा; कंप्यूटर अध्यापकों ने सरकार के विरुद्ध खोला मोर्चा, छेड़ेंगे जन आंदोलन
Punjab News, 4 जनवरी 2026:
पिछले कई वर्षों से अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे कंप्यूटर अध्यापकों ने अब आर-पार की जंग का एलान कर दिया है। कंप्यूटर फैकल्टी एसोसिएशन, पंजाब द्वारा नए साल की शुरुआत के अवसर पर उलीकी गई राज्य स्तरीय रणनीति के चलते राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अध्यापकों का कहना है कि जिन्होंने सत्ता में आने के लिए उनके कंधों का सहारा लिया, आज वही उनके हक पर डाका मार रहे हैं।
एसोसिएशन के सीनियर नेताओं प्रदीप कुमार मलूका, लखिंदर सिंह फिरोजपुर, जसपाल फतेहगढ़ साहिब, हरचरण सिंह और जतिंदर सिंह सोढ़ी ने तीखे शब्दों में कहा कि साल 2022 के चुनावों से पहले वर्तमान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और ‘आप’ सुप्रीमों अरविंद केजरीवाल ने कंप्यूटर अध्यापकों की मांगों को जायज माना था। उन्होंने वादा किया था कि सरकार बनते ही सभी मसले हल होंगे, पर 4 साल बीत जाने के बाद भी अध्यापकों के पल्ले सिर्फ निराशा ही पड़ी है।
सड़कों पर गुजारी रात, फिर भी मुख्यमंत्री के पास मिलने का समय नहीं
रोष प्रकट करते हुए नेताओं ने बताया कि पिछले साल मुख्यमंत्री के शहर संगरूर में भारी गर्मी, बारिश और कड़ाके की ठंड में 6 महीने से अधिक समय सड़कों पर गुजारा। हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे संघर्ष के बावजूद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज तक एक बार भी अध्यापकों के साथ मीटिंग करने की जरूरत नहीं समझी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार सार्वजनिक मंचों पर मांगें मानने के दावे करती है और दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में उनके हक के विरुद्ध केस लड़ रही है, जो सरकार की दोगली नीति को साफ दर्शाता है।
क्या हैं मुख्य मांगें?
अध्यापकों ने अपनी मांगों को दोहराते हुए कहा कि, कंप्यूटर अध्यापकों को उनके रेगुलर ऑर्डरों के अनुसार छठे पे-कमीशन सहित सभी लाभ दिए जाएं। बिना किसी देरी और शर्त के कंप्यूटर अध्यापकों को शिक्षा विभाग में मर्ज किया जाए। जिन कंप्यूटर अध्यापकों की मौत हो चुकी है उनके परिवारों को वित्तीय सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। अध्यापकों ने सरकार को सीधी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते मांगें न मानी गईं तो यह संघर्ष एक बड़े जन आंदोलन का रूप धारण कर लेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

