Union Budget 2026- केंद्रीय बजट 2026 में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, जारी रहेगी पुरानी व्यवस्था
Union Budget 2026- केंद्रीय बजट 2026 में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, जारी रहेगी पुरानी व्यवस्था
Union Budget 2026-
रविवार को लगातार नौवां केंद्रीय बजट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया। इस दौरान वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले साल किए गए बड़े टैक्स सुधारों के बाद इस बार इनकम टैक्स की दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी लोगों को जिस टैक्स सिस्टम के तहत अभी टैक्स देना पड़ रहा है, वही व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी।
हालांकि इनकम टैक्स की बुनियादी संरचना पहले जैसी ही रहेगी, लेकिन बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री ने टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान बनाने और टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए कई कदमों का ऐलान किया।
वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स रिटर्न में संशोधन करने की अंतिम तारीख को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च करने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए केवल मामूली शुल्क देना होगा। गौरतलब हो, रिटर्न फाइल करने की तारीखों को भी अलग-अलग किया गया है। आईटीआर-1 और आईटीआर-2 भरने वाले लोग पहले की तरह 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल करेंगे। वहीं जिन कारोबारों का ऑडिट नहीं होता और ट्रस्ट्स को 31 अगस्त तक का समय मिलेगा।
टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए यह भी कहा गया है कि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण से मिलने वाला ब्याज अब इनकम टैक्स से मुक्त होगा। साथ ही इस पर टीडीएस भी नहीं काटा जाएगा।
भारत की कंपनियों को पूंजीगत सामान देने वाले एनआरआई को भी पांच साल तक इनकम टैक्स में छूट दी जाएगी।
वित्त मंत्री ने स्रोत पर टैक्स वसूली (टीसीएस) की दरों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है। विदेश यात्रा पैकेज की बिक्री पर टीसीएस को 5 और 20 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है और अब इसमें न्यूनतम राशि की कोई शर्त नहीं होगी। लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत विदेश में पढ़ाई और इलाज पर लगने वाला टीसीएस भी 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है।
वहीं, छोटे टैक्स देने वालों के लिए एक नया ऑटोमैटिक सिस्टम लाया जाएगा। इसके तहत कम या शून्य टैक्स कटौती का सर्टिफिकेट लेने के लिए अब टैक्स अधिकारी के पास आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी।
जिन टैक्सपेयर्स के पास अलग-अलग कंपनियों के शेयर हैं, वे अब फॉर्म 15जी या 15एच सीधे डिपॉजिटरी में जमा कर सकेंगे। डिपॉजिटरी यह फॉर्म संबंधित कंपनियों तक खुद भेज देगी।
शेयर बाजार से जुड़े लेनदेन में वित्त मंत्री ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस पर 0.01 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है।

