पंजाब विश्वविद्यालय में त्रिभाषी एआई-एमएल शब्दावली निर्माण पर विचार-विमर्श का दूसरा चरण आरम्भ
पंजाब विश्वविद्यालय में त्रिभाषी एआई-एमएल शब्दावली निर्माण पर विचार-विमर्श का दूसरा चरण आरम्भ
चंडीगढ़, 20 जुलाई, 2026:
पंजाब विश्वविद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence- AI) एवं मशीन लर्निंग (Machine Learning- ML) की त्रिभाषी (अंग्रेज़ी-हिंदी-पंजाबी) शब्दावली तैयार करने हेतु विशेषज्ञ सलाहकार समिति (Expert Advisory Committee- EAC) की बैठक का दूसरा चरण आज आरम्भ हुआ। 20 से 25 जुलाई, 2026 तक आयोजित होने वाली इस छह दिवसीय बैठक का आयोजन वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग (Commission for Scientific and Technical Terminology- CSTT), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जा रहा है तथा इसकी मेज़बानी पंजाब विश्वविद्यालय के पंजाबी अध्ययन विभाग द्वारा की जा रही है। यह बैठक 5 से 9 मई, 2026 के दौरान आयोजित प्रथम चरण की विचार-विमर्श श्रृंखला का अगला चरण है।
विशेषज्ञ सलाहकार समिति के सदस्यों एवं आमंत्रित विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए पंजाबी अध्ययन विभाग की अध्यक्ष डॉ. परमजीत सिद्धू ने इस राष्ट्रीय महत्व की परियोजना के लिए पंजाब विश्वविद्यालय पर विश्वास व्यक्त करने हेतु सीएसटीटी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पंजाबी भाषा में तकनीकी शब्दावली का विकास उभरती प्रौद्योगिकियों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होगा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देगा।
विशेषज्ञ सलाहकार समिति के संयोजक प्रो. सुनील के. सिंह ने कहा कि यह शब्दावली क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी ज्ञान के अध्यापन, अधिगम, अनुवाद तथा प्रसार को सुदृढ़ करेगी और उन्नत वैज्ञानिक शिक्षा को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँचाने में सहायक सिद्ध होगी।
विशेषज्ञ सलाहकार समिति की सदस्य तथा पंजाब विश्वविद्यालय की अनुसंधान एवं विकास निदेशक प्रो. सविता ने उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानकीकृत बहुभाषी तकनीकी शब्दावली का विकास समावेशी डिजिटल संसाधनों के निर्माण, एआई-आधारित भाषा प्रौद्योगिकियों के विकास तथा पंजाबी भाषा को डिजिटल और एआई पारिस्थितिकी तंत्र में सशक्त बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
सीएसटीटी का प्रतिनिधित्व करते हुए सहायक निदेशक दीपक कुमार ने भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली के विकास एवं मानकीकरण हेतु आयोग द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एआई-एमएल शब्दावली परियोजना भारतीय भाषाओं के माध्यम से उन्नत तकनीकी ज्ञान को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
बैठक में देशभर से शिक्षाविद्, भाषा विशेषज्ञ तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग और कंप्यूटर विज्ञान के विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। पंजाबी विभाग से डॉ. सिद्धू के अतिरिक्त विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. उमा सेठी तथा प्रो. योगराज भी विशेषज्ञ के रूप में इस बैठक में सहभागिता कर रहे हैं।
विशेषज्ञ सलाहकार समिति की छह दिवसीय बैठक के दौरान एआई एवं मशीन लर्निंग से संबंधित अंग्रेज़ी-हिंदी-पंजाबी त्रिभाषी पारिभाषिक शब्दावली को अंतिम रूप दिया जाएगा। यह पहल भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक ज्ञान के विकास तथा बहुभाषी तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण योगदान सिद्ध होगी। इस शब्दावली में कुल 4,500 पारिभाषिक शब्द शामिल हैं।

