आधुनिक पंजाबी साहित्य में शिव कुमार बटालवी की कविता के महत्व पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

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आधुनिक पंजाबी साहित्य में शिव कुमार बटालवी की कविता के महत्व पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

चंडीगढ़ , 25 फ़रवरी 2026

25 फ़रवरी 2026 को स्कूल ऑफ पंजाबी स्टडीज़, पंजाब यूनिवर्सिटी के अंतर्गत स्थापित शिवकुमार बटालवी चेयर द्वारा आधुनिक पंजाबी साहित्य में शिवकुमार बटालवी की कविता के महत्व पर एक भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी का आयोजन चंडीगढ़ साहित्य अकादमी तथा पंजाब कला प्रीषद के आर्थिक सहयोग से संपन्न हुआ, जो शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के सार्थक समन्वय का प्रमाण है।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जो ज्ञान और साहित्यिक चेतना के आलोक का प्रतीक है। विभागाध्यक्ष एवं शिवकुमार बटालवी चेयर के अध्यक्ष प्रो. डॉ. योगराज ने उपस्थित अतिथियों का स्वागत करते हुए विभाग में स्थापित इस चेयर के शैक्षणिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह चेयर शिवकुमार बटालवी के काव्य के गंभीर अध्ययन, अनुसंधान और पुनर्पाठ की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. योजना रावत, डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रक्शन्स, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ उपस्थित रहीं। अपने संबोधन में उन्होंने शिवकुमार बटालवी की काव्यात्मक विलक्षणता, उनकी भावात्मक तीव्रता और अस्तित्वगत संवेदनशीलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्तमान तुलनात्मक एवं अंतर्विषयी अध्ययन के युग में यह चेयर महत्वपूर्ण शैक्षणिक योगदान दे सकती है।

मुख्य व्याख्यान प्रख्यात पंजाबी आलोचक प्रो. सुरजीत द्वारा प्रस्तुत किया गया। डॉ. सुरजीत सिंह ने कहा कि बटालवी की कविता की जड़ें पंजाबी सांस्कृतिक अवचेतन में गहराई तक धंसी हुई हैं, जहाँ बिरहा, आंतरिक तनाव और मृत्यु की चाह जैसे भाव सृजनात्मक अर्थ ग्रहण करते हैं। उन्होंने शिव की कविता को वारिस शाह से लेकर आधुनिक संवेदनाओं तक फैली अमूल्य साहित्यिक विरासत बताया। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि शिव की कविता को स्थापित आलोचनात्मक प्रतिमानों से परे व्यापक सांस्कृतिक और दार्शनिक संदर्भों में समझने की आवश्यकता है।

अपने विशेष वक्तव्य में स्वर्णजीत सवी ने काव्य-पाठ के माध्यम से शिव की व्यक्तित्व-छवि और काव्यात्मक बिंबों को प्रभावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे संगोष्ठी का वातावरण और अधिक सर्जनात्मक एवं भावपूर्ण बन गया।

सत्र की अध्यक्षता चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. मनमोहन ने की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पंजाबी आलोचना ने इस महान कवि के साथ पूर्ण न्याय नहीं किया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि पंजाब विश्वविद्यालय में स्थापित यह चेयर भविष्य में शिव की कविता के नए आयामों को उद्घाटित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उद्घाटन सत्र के अंत में डॉ. उमा सेठी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। संगोष्ठी का सफल संचालन समन्वयक डॉ. परमजीत कौर सिद्धू द्वारा अत्यंत दक्षता और संतुलन के साथ किया गया।

उद्घाटन सत्र के उपरांत दो अकादमिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें कुल आठ शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। इन सत्रों में शिव की कविता के विविध आयामों – विषय-वस्तु, शिल्प, सांस्कृतिक चेतना और आधुनिकतावादी संवेदना – पर गंभीर और सार्थक विमर्श हुआ। प्रथम अकादमिक सत्र की अध्यक्षता चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के महासचिव सुभाष भास्कर ने की, जबकि द्वितीय सत्र की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध पंजाबी कवयित्री मनजीत इंद्रा ने की।

इस संगोष्ठी में विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा विभिन्न महाविद्यालयों के प्राध्यापकों की उत्साहपूर्ण और उल्लेखनीय उपस्थिति रही। बौद्धिक गंभीरता, संवादात्मक ऊर्जा और साहित्यिक प्रतिबद्धता से परिपूर्ण यह आयोजन आधुनिक पंजाबी साहित्य में शिवकुमार बटालवी की केंद्रीय और शाश्वत उपस्थिति को पुनः स्थापित करने वाला सिद्ध हुआ।

 

 

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