पंजाब के सहायता प्राप्त स्कूल अध्यापकों और कर्मचारियों द्वारा 9 मई को मुख्यमंत्री के शहर धूरी में विशाल रोष मार्च का ऐलान
पंजाब के सहायता प्राप्त स्कूल अध्यापकों और कर्मचारियों द्वारा 9 मई को मुख्यमंत्री के शहर धूरी में विशाल रोष मार्च का ऐलान
कई-कई महीनों से वेतन और पी.पी.ओ. जारी न करने के कारण विशाल रोष मार्च और प्रदर्शन के लिए मजबूर हुए अध्यापक
चंडीगढ़, 6 मई 2026-
पंजाब स्टेट एडेड स्कूल टीचर्स एंड अदर एम्प्लॉइज यूनियन पंजाब-1967 द्वारा सूबा प्रधान गुरमीत सिंह मदनीपुर और जनरल सचिव शरणजीत सिंह कादीमाजरा के नेतृत्व में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नाम एक अहम नोटिस जारी किया गया है।
यूनियन ने सरकार के नकारात्मक रवैये और लंबित पड़ी मांगों के विरोध में 9 मई 2026 को मुख्यमंत्री के चुनाव क्षेत्र धूरी में एक भारी रोष मुजाहिरा और रोष मार्च निकालने का फैसला किया है।
यूनियन के नेताओं ने बड़े अफ़सोस के साथ बताया कि आज़ादी से पहले के चल रहे इन एडेड स्कूलों को साल 1967 में दिल्ली पैटर्न पर ग्रांट-इन-एड स्कीम के अधीन लाया गया था।
आम आदमी पार्टी ने चुनावों के दौरान वादा किया था कि एडेड स्टाफ को सरकारी कर्मचारियों के बराबर सुविधाएं दी जाएंगी, पर आज स्थिति यह है कि कई ज़िलों में पिछले 11 महीनों से वेतन की ग्रांट जारी नहीं हुई। पूरे पंजाब में जनवरी से मार्च 2026 तक की ग्रांट पेंडिंग पड़ी है, जिसके कारण कर्मचारियों के घरों में चूल्हे जलने भी मुश्किल हो गए हैं।
मुख्य मांगें और रोष के मुख्य कारण
जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 तक की ग्रांट तुरंत जारी की जाए। साथ ही साथ सभी रिटायर्ड अध्यापकों और अन्य कर्मचारियों के पी.पी.ओ. (PPO) भी तुरंत जारी किए जाएं।
चुनाव मैनिफेस्टो के अनुसार एडेड स्टाफ को सरकारी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं। यूनियन द्वारा 09-04-2026 को भेजे गए ‘खून से लिखे मांग पत्र’ पर कोई भी कार्रवाई न होना बेहद निराशाजनक है।
उपरोक्त मामलों के अलावा शिक्षा और वित्त विभाग द्वारा पेंशनरों को साल-साल से भी अधिक समय हो जाने के बावजूद भी पी.पी.ओ. जारी न करने पर भी सभी अध्यापकों और अन्य कर्मचारियों में काफी रोष पाया जा रहा है। विभागीय स्तर पर हो रही देरी और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त रोष का ही नतीजा इस विशाल रोष प्रदर्शन के रूप में सामने आ रहा है।
यूनियन के नेताओं, जिनमें कन्वीनर गुरमीत सिंह मदनीपुर, जनरल सचिव शरणजीत सिंह कादीमाजरा, एबिट मसीह (जालंधर), अशोक वडेरा (फ़िरोज़पुर) और हरदीप सिंह ढींडसा (रोपड़) शामिल हैं, ने कहा कि यदि 9 मई से पहले सरकार ने उनकी ग्रांटें जारी न कीं और कोई सार्थक हल न निकाला, तो हज़ारों की संख्या में महिला स्टाफ और रिटायर्ड कर्मचारी धूरी की सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। इस संघर्ष से निकलने वाले किसी भी नतीजे के लिए पंजाब सरकार ज़िम्मेवार होगी।

