समकालीन पंजाबी पाठक और बदलती पठन संस्कृति पर विचार-विमर्श
समकालीन पंजाबी पाठक और बदलती पठन संस्कृति पर विचार–विमर्श
Media PBN चंडीगढ़:
पंजाबी अध्ययन स्कूल, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ द्वारा RUSA 2.0 के सहयोग से “पंजाबी का समकालीन पाठक : बदलती पठन संस्कृति, मीडिया और नई साहित्यिक संभावनाएँ” विषय पर लोक संपर्क एवं जन सहभागिता गतिविधि का आयोजन मोहन सिंह दीवाना हॉल में किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से आए शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
उद्घाटन सत्र में स्कूल की प्रमुख प्रो. परमजीत कौर सिद्धू ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि समकालीन पंजाबी पाठक में अपार संभावनाएँ हैं और साहित्य तथा पाठक के बीच गंभीर एवं सार्थक संवाद स्थापित करने की आवश्यकता है। प्रो. गंगा राम चौधरी, समन्वयक, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA), ने कहा कि आज का पाठक जागरूक और सजग है तथा उसके लिए अनुकूल साहित्यिक वातावरण तैयार करने की आवश्यकता है।
प्रसिद्ध लेखक एवं चिंतक डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने कुंजी वक्तव्य में कहा कि पाठक के साथ–साथ पढ़ने की तकनीक और तौर–तरीके भी बदल रहे हैं। उन्होंने पाठक की महत्ता तथा मानव जीवन में पुस्तक और साहित्य की भूमिका को रेखांकित किया। अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. सुरिंदर कुमार दवेश्वर ने कहा कि पाठक एक विशिष्ट उप–संस्कृति के रूप में अपनी भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पुस्तक संस्कृति का स्थान नहीं ले सकते। सत्र का संचालन प्रो. उमा सेठी ने किया।
प्रथम अकादमिक सत्र में प्रकाशक हरीश जैन, लेखक जंग बहादुर गोयल एवं जसबीर भुल्लर, डॉ. प्रवीण तथा जसपाल सिंह ने पैनलिस्ट के रूप में भाग लिया। पैनलिस्टों ने पंजाबी पुस्तकों, अनुवाद, लेखकों के सामने उपस्थित चुनौतियों तथा नए पाठक तैयार करने की आवश्यकता पर विचार साझा किए। सत्र का संचालन प्रो. सरबजीत सिंह ने किया।
द्वितीय अकादमिक सत्र में डॉ. भूपिंदर सिंह, प्रो. सी. पी. कंबोज, डॉ. बलविंदर, जसपाल सिंह, गगनदीप सिंह और हरदीप सिंह ने नए पाठक, डिजिटल माध्यमों तथा बदलते साहित्यिक सरोकारों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने कहा कि नए माध्यम साहित्य के विरोधी नहीं हैं, बल्कि वे साहित्य के प्रसार और पाठकों तक उसकी पहुँच के लिए नई संभावनाएँ प्रस्तुत करते हैं। सत्र का संचालन प्रो. योगराज अंगरिश ने किया।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. अकविंदर कौर ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और श्रोताओं का धन्यवाद किया। समग्र रूप से कार्यक्रम ने समकालीन पंजाबी पाठक, बदलती पठन संस्कृति तथा डिजिटल युग में साहित्य की नई संभावनाओं पर सार्थक संवाद के लिए एक प्रभावी मंच प्रदान किया। कार्यक्रम की विशेष उपलब्धि यह रही कि विद्यार्थियों ने केवल श्रोताओं के रूप में ही नहीं, बल्कि समकालीन पाठक के रूप में उत्साहपूर्ण भागीदारी दर्ज कराई।

