15 अगस्त को फिरोजपुर में CM Mann का काली झंडियों से विरोध करेंगे कंप्यूटर अध्यापक, 2022 का चुनावी घोषणा पत्र जलाकर करेंगे प्रदर्शन
15 अगस्त को फिरोजपुर में मुख्यमंत्री का काली झंडियों से विरोध करेंगे कंप्यूटर अध्यापक, 2022 का चुनावी घोषणा पत्र जलाकर करेंगे प्रदर्शन
Punjab News
प्रदेश भर में कंप्यूटर अध्यापकों द्वारा अपने अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने के लिए किए जा रहे लगातार संघर्ष की कड़ी में कंप्यूटर फैकल्टी एसोसिएशन (पंजाब) द्वारा 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवसर पर फिरोजपुर पहुंच रहे मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का काली झंडियों से विरोध करने और बड़ा प्रदर्शन करने का बड़ा ऐलान किया गया है।
एसोसिएशन के नेतृत्व में होने वाले इस एक्शन के दौरान आम आदमी पार्टी के 2022 के चुनावी घोषणा पत्र को जलाकर सरकार के झूठे वादों के खिलाफ विरोध जताया जाएगा और आम लोगों को सरकार की असलियत से अवगत करवाया जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में अन्य अध्यापक संगठन भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों प्रदीप कुमार मलूका, लखविंदर सिंह फिरोजपुर, गुरविंदर सिंह, जतिंदर सिंह सोढी, मनीष मुदकी, मिंटू थॉमस, विकास छाबड़ा, मोहन लाल, गुरबख्श सिंह, रमित नारंग, बलविंदर सिंह, कमलप्रीत सिंह, गौरव, गुरदीप सिंह, मनदीप कौर, आशा, सारिका, गीतू बाला, मोनिका, योगिता, लकी कथूरिया, कुलविंदर कौर, सोनिया सेठी, कंचन, हरदीप कौर, ज्योति, सुखजिंदर पाल कौर, विशाल चलाना आदि ने बताया कि उनकी भर्ती 21 साल पहले हुई थी और 2011 में उन्हें पिकटस सोसाइटी के तहत रेगुलर किया गया था। लेकिन मौजूदा सरकार ने उनके वेतन और लाभों पर बड़ा डाका मारा है।
उन्होंने बताया कि शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस, वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और ‘आप’ के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा के साथ पिछले साढ़े चार सालों के दौरान हुई दर्जनों बैठकों का नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा है। सभी मंत्रियों की ओर से उन्हें झूठे आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं दिया गया, जो कि कंप्यूटर अध्यापकों के साथ धोखा है।
नेताओं ने दोहराया कि उनकी मांगें बिल्कुल जायज हैं। उनकी मुख्य मांग है कि कंप्यूटर अध्यापकों को बिना शर्त शिक्षा विभाग में मर्ज किया जाए, पंजाब सिविल सर्विस नियमों के तहत पूरा वेतन व भत्ते दिए जाएं और 6वां पे-कमीशन तुरंत लागू किया जाए। इसके अलावा जिन कंप्यूटर अध्यापकों की पिछले समय के दौरान किसी भी कारणवश मृत्यु हो चुकी है, उनके आश्रितों को बनती वित्तीय सहायता के साथ-साथ एक सरकारी नौकरी दी जाए।
नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि प्रदेश सरकार ने समय रहते कंप्यूटर अध्यापकों के हक बहाल न किए, तो जल्द ही उनका यह संघर्ष संगरूर की सड़कों पर एक बड़े आंदोलन का रूप लेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी।

